सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में वर्चस्व की जंग, दबंगों का उपद्रव

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कांग्रेस के मजबूत दुर्ग माने जाने वाली रायबरेली की सियासत नई करवट लेती हुई नजर आ रही है. रायबरेली संसदीय सीट पर वोटिंग के 8 दिन के बाद ही सियासी वर्चस्व की जंग तेज हो गई है. कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ चुनावी मैदान में बीजेपी से ताल ठोकने वाले दिनेश प्रताप सिंह के खिलाफ रायबरेली में सारे विरोधी एकजुट हो गए हैं. उन्होंने दिनेश प्रताप सिंह के भाई अवधेश सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी से बेदखल करने का कवायद तेज कर दी है.

बता दें कि रायबरेली में जिला पंचायत अध्यक्ष अवधेश सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान से पहले जिले में जमकर बवाल हुआ. रायबरेली सदर से कांग्रेस विधायक अदिति सिंह लखनऊ से रायबरेली के लिए जिला पंचायत चुनाव में पहुंच रही थीं. अदिति सिंह के साथ जिला पंचायत सदस्य राकेश अवस्थी समेत करीब 28 जिला पंचायत सदस्य थे.

आरोप है कि अवधेश सिंह की जिला पंचायती बची रहे इसलिए दिनेश सिंह के आदमी लखनऊ से रायबरेली के पूरे रास्ते पर लगे हुए थे. वो सुनिश्चित करना चाहते थे किसी भी तरह अदिति सिंह जिला पंचायत सदस्यों को लेकर रायबरेली न पहुंचे पाएं. इसके बावजूद अदिति सिंह का काफिला लगातार रायबरेली की तरफ बढ़ता जा रहा था. इसी बीच, दबंगों ने बछरावां-लखनऊ मार्ग के टोल प्लाजा पर विधायक और जिला पंचायत सदस्यों के वाहन पर टक्कर मारी और फायरिंग शुरू कर दी. सदस्यों पर फायरिंग के बाद ही दबंगों ने सदर विधायक अदिति सिंह की गाड़ी का पीछा किया.

आरोप है कि अदिति सिंह गाड़ी जब गंगागंज के पास पहुंची तो रायबरेली के जिला पंचायत अध्यक्ष अवधेश सिंह रॉन्ग साइड से अदिति सिंह के काफिले के सामने आ गए. अवधेश सिंह के साथ तकरीबन 15 गाड़ियां थीं और सभी में असलहाधारी मौजूद थे. दबंगों ने कांग्रेस विधायक अदिति सिंह के काफिले में शामिल गाड़ियों को पलटना शुरू कर दिया. इसके बाद गाड़ियों में मौजूद जिला पंचायत सदस्य गाड़ियों से उतरकर भागने लगे. अदिति सिंह भी इस हमले में घायल हो गईं.

दबंगों ने जिला पंचायत सदस्य सदस्य राकेश अवस्थी का अपहरण कर उनके साथ मारपीट की. हालांकि बाद में उन्हें छुड़ा लिया गया. इन सारे मामलों के लिए दिनेश प्रताप सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष अवधेश सिंह को जिम्मेदार बताया जा रहा है. इन सारे मामलों के बीच ऊंचाहार से सपा विधायक मनोज पांडेय शहीद स्मारक पर धरने पर बैठ गए हैं.

दरअसल, रायबरेली की सियासत पर वर्चस्व को लेकर यह जंग हो रही है. रायबरेली की राजनीति के बेताज बादशाह रहे अखिलेश सिंह इन दिनों बीमार चल रहे हैं और उनकी राजनीतिक विरासत अदिति सिंह संभाल रही हैं. 2017 में रिकॉर्ड मतों से विधानसभा चुनाव जीतकर वह विधायक बनी हैं. इसके बाद रायबरेली के नगर पालिका चुनाव में अदिति सिंह अपने चहेते को जिताने में कामयाब रही हैं. अदिति सिंह का राजनीतिक ग्राफ रायबरेली की सियासत में लगातार बढ़ता जा रहा है. हाल ही में सोनिया गांधी के चुनाव में भी अदिति सिंह ने काफी मेहनत की है.

रायबरेली की सियासत में अदिति सिंह के बढ़ते राजनीति प्रभाव से दिनेश प्रताप सिंह को कांग्रेस छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा. दिनेश सिंह पिछले 7-8 वर्षों में राजनीतिक ताकत के रूप में उभरे हैं. वो दूसरी बार एमएलसी हैं और उनके परिवार में ही दूसरी बार जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी भी है. इसके अलावा उनके एक भाई हरचंद्रपुर से विधायक हैं.

रायबरेली की राजनीति में मनोज पांडेय तीसरी ताकत के रूप में उभरे हैं. दूसरी बार विधायक हैं और रायबरेली की सियासत में अपना वर्चस्व कायम रखने का उन्होंने सपना संजो रखा है. इसी के चलते उन्होंने अपने भाई को जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ाया था, लेकिन वो जीत नहीं सका. उनके भाई की हार के पीछे दिनेश प्रताप सिंह की अहम भूमिका रही है. इस हार की टीस आज भी मनोज पांडेय के दिल में है. इसलिए मनोज पांडेय ने अपनी वर्षों पुरानी दुश्मनी और भाई की मौत को भुलाकर अखिलेश सिंह से दोस्ती कर ली है. जबकि मनोज पांडेय के भाई राकेश पांडेय के कत्ल के मामले में अखिलेश सिंह पर आरोप लगे थे.

रायबरेली की सियासत से दिनेश प्रताप सिंह के वर्चस्व को खत्म करने के लिए मनोज पांडेय और अदिति सिंह एक साथ खड़े नजर आ रहे हैं. लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने एक जनसभा में कहा था कि चुनाव के बाद दिनेश प्रताप सिंह न तो एमएलसी रह पाएंगे और न ही जिला पंचायत अध्यक्ष.

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